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सयानी बन्नो

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शादी हमारे जीवन मे एक बड़ा अंतर लाता हैं , एक लड़के और लड़की दोनों के जीवन मे बहुत सी चीजे बदलती हैं , लेकिन कहीं न कहीं एक लड़की का जीवन बहुत हद तक बदल जाता हैं , शुरुआत आपने आप को बदलने से ही होती हैं , पूरा परिवर्तन लड़के के परिवार के हिसाब से हो जाता हैं । ऐसे मे जब एक पिता अपनी बेटी को पहली बार उसके ससुराल मिलने जाता हैं तो वो उसके बदलाव को देखकर दंग रह जाता हैं । उसके उस भाव को शब्दों मे दिखाने का एक छोटा सा प्रयास हैं ।उम्मीद करता हूँ की आपको पसंद आएगा । उपयुक्त कहानी पूरी तरह से रचित एवं काल्पनिक हैं । इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं हैं । ये पूरी कहानी पिता के संदर्भ से की गयी हैं , की आखिर एक पिता क्या महसूस करता हैं , जब वह अपनी बेटी को ससुराल मे देखता हैं । आ ज दिन रविवार , मन हुआ बन्नो से मिल आऊँ , वैसे तो हफ्ते-दर पहले से मेरी योजना थी की मैं बन्नो के घर से हो आऊँ । आज उसकी शादी को 3 महीने हो गए , मैंने निश्चय किया की मैं अकेले ही उसके ससुराल जा कर मिल आऊंगा । बन्नो की माँ ने आज , बन्नो की मनपसंद चीजे , मावे सुबह से ही बनाकर झोले मे रखने शुरू कर...

दो टूक आपसे

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नमस्कार दोस्तों , मैं प्रेम आपके सपक्ष पुन: अपनी कुछ बातें लेकर आया हूँ । बीते साल इसी समय मैंने अपनी ब्लॉगिंग करियर की शुरुआत की थी । उस समय बस मन मे केवल एक सी बात थी , अपने विचार को एक माध्यम के सामने पेश करना और बेशक इसका जरिया ब्लॉगर रहा हैं , बहुत कोशिश थी की ज्यादा से ज्यादा कहानियाँ प्रस्तुत करूँ लेकिन समय और जीवन के भाग-दौड़ मे चंद ही लिख पाया ,  लेकिन फिर भी बीते एक साल मे मेरी उम्मीद से ज्यादा लोगो की सराहना मिली । लेखन संबंधी ब्लॉग को ज्यादातर लोग पढ़ते नहीं हैं , ऐसे मे कुछ लोग ही आपकी रचनाए पढ़ जाये इससे बेहतर और क्या बात हो सकती हैं । आप सभी को शुक्रिया  जिन्होंने  मेरे ब्लॉग को अपना कीमती समय दिया , और उम्मीद करता हूँ की भविष्य मे भी देंगे । हाल ही मैंने अपने लेखन क्षेत्रों को विस्तार करते हुए I LEARN, WE LEARN की शुरुआत की , जिसमे आपको कुछ अलग तरह की लेखन सामग्री आपको मिलेगी । तकनीक , ज्ञान और फिल्म और  गैजेट  से संबंधी जानकरियाँ आपको मिलती रहेगी । इस साल कोशिश रहेगी की ZINDAGI Unplugged मे भी आपको कुछ अनोखे ...

मन की बात #1 - मेरी नानी

बहुत मुश्किल होता हैं अपने किसी करीबी के बारे मे लिखना , अक्सर हमारी ज़िंदगी मे कुछ ऐसे लोग होते हैं जिनका हमें ज्यादा एहसास नहीं होता लेकिन जब वो हमारी ज़िंदगी से चले जाते हैं तब अलग सी कमी रह जाती हैं । मेरे लिए भी मुश्किल था अपने ज्याति ज़िंदगी के बारे लिखना , कहानियाँ तो हम सोंच कर , महसूस कर लिख लेते हैं , पर आपके अपने जस्बात लिखना कठिन होता हैं। पर वो तो कहते हैं न जब भाव मन मे प्रबल होते हैं तो उन्हे शब्द बनने मे ज्यादा समय नहीं लगता । मेरे बचपन से ही मेरी नानी और दादी बस थी , नाना और दादा को तो बचपन से ही नहीं देखा था । दादी के साथ तो कुछ साल रहे थे और जब वो गुजरी तब मैं छोटा था , शायद महसूस तो उस वक़्त भी हुआ होगा लेकिन व्यक्त नहीं हो पाया होगा । नानी की याद मेरे मन मे तब से हैं जब मामा के कच्चे घर हुआ करते थे , सब कुछ मन मे एकदम वैसे ही हैं जैसा उस वक़्त हुआ करते थे । वही कच्ची गलियाँ , लकड़ी के दरवाजे , मामा की छोटी सी दुकान , किनारे पे रखे पैरावट । फर्क बस आज इतना हैं की आज वो सब यादें मन मे हैं । जब-जब मैं नानी शब्द लिखता हूँ , मेरे मन में नानी का वही मुस...

एक खत माँ के नाम ....

आज का ये ब्लॉग एक खत के रूप मे हैं  जिसमे एक बेटी अपने माँ को अपने नए शहर के , अपने काम-काज के अनुभव बताती हैं , और वो एक तुलनात्मक संबंध बनती हैं अपने पुराने घर और आज के अपने घर (फ्लैट) मे.... भले इस ब्लॉग के लिखे शब्द मेरे हैं पर मैंने कोशिश किए हैं की एक लड़की के मन की बात को लिख पाऊँ....उम्मीद करता हूँ आपको पसंद आएगी... एक खत माँ के नाम .... प्रणाम माँ तुम्हारी चिट्ठी मिली , पढ़कर बहुत अच्छा लगा , आज के जमाने मे कौन आखिर चिट्ठियाँ लिखता हैं , पर हमेशा तुम्हारी जिद और अपने आप की यूं फोन से दूरी मेरी तो समझ से परे हैं..... मैंने इस महीने थोड़े ज्यादा पैसे बैंक मे डाले हैं ... हो सके तो इस महीने पास की दुकान से मोबाइल ले लेना जिससे मैं तुमसे रोज बात कर सकूँ ... तुमने मेरे ऑफिस के बारे मे पूछा था... वह नजदीक मे ही हैं... पर मुझे फिर भी वहाँ जाने के लिए बस या मेट्रो लेनी पड़ती है... ऑफिस की तरफ से मुझे एक फ्लैट दिया गया हैं । हालांकि एक कमरे वाला ही हैं पर वहाँ के घर से बड़ा हैं । सुबह से शाम आफिस , और रात को गाड़ियों के शोर मे पूरा समय निकल जाता हैं , रविवार की छ...

बात छेड़ दी, जो तुमने

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बात छेड़ दी, जो तुमने सब कुछ शांत, अविरल से था मेरा जीवन जैसे बहते हुए पानी में तिनके की भांति , नीले गगन में सफेद बादलों की भांति , धीरे धीरे बहते हवाओं में उस उड़ते पतंगों की भांति ..... सब कुछ एक पल में बदल सा दिया तुमने, जो तुम ने रुक कर बात क्या छेड़ दी . . . अधूरी थी ज़िंदगानी मेरी न कल , न आज की परवाह थी कभी घर-बार , न रास्तों की दरकार थी कभी तन्हा थे, न किसी की जरूरत थी कभी ( पर फिर भी ) सब कुछ एक पल में बदल सा दिया तुमने, जो तुमने रुक कर क्या बात छेड़ दी . . . बेताब से थे सपने मेरे मंज़िल न ठिकाने की जररूत थी मुझे सादे से कपड़े, सादी सी जीवनी थी मेरी न कोई शौक, ना कोई कमजोरियां थी मेरी सब कुछ एक पल में बदल सा दिया तुमने, जो तुमने रुक कर बात क्या छेड़ दी . . . अकेले थे , मगर खुश थे सही खुद को समझ रहे थे , सब कुछ संभाल रहे थे सही अव्वल न थे, पर कभी आख़री भी न थे न जाने वो वक़्त का तकाज़ा क्या रहा जो . . .  सब कुछ एक पल में बदल दिया तुमने, जो तुमने रुक कर क्या बात छेड़ दी . . . जो तुमने रुक कर क्या बात छेड़ दी . . . ...