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Happy Republic Day

जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं वह हृदय नहीं है पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं प्रिय पाठक , आप सभी पाठकों को 68 वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई । आज का इस ब्लॉग मैं अपने देश के प्रति कहना कहूँगा , हालांकि यह मेरा कोई विषय नही है..परंतु मैं समझता हूँ की एक देश का नागरिक होने के नाते मुझे इस पर संवाद करना चाहिए । भारत हमारा एक विशाल देश हैं , यहाँ विभिन्न धर्म , जाति , संप्रदाय के लोग यहाँ रहते है... हम अंदाज़ा भी नही लगा सकते की हमारे यहाँ कितनी भाषाये और बोलियाँ है...हर छोर पर कुछ अलग ही रंग देखने को मिलता है  और यही बात हमे दूसरों से अलग बनती है । अतुल्य भारत ( Incredible INDIA ) जो बात हम मे खास है वो हैं हमारी संस्कृति , हमारी परंपरा और हमारी लोक-संस्कृति , कहीं न कहीं हम इसी लिए दुनिया भर मे विख्यात हैं , अगर मैं बात करू तो 1947 से आज तक हमारे देश ने एक बड़ा फासला तय किया है... विज्ञान से लेकर प्रोद्योगिकी , खेल शिक्षा सब मे सुधार आया है...आज हम देश के उन 5 शक्तिशाली देशो मे से है जो दुनिया के प्रभावी एवम विकासशी...

Interaction With You

नमस्कार दोस्तों , किसी ने सच ही कहा है- हैं ज़िंदगी तो अपने है है अपने तो ज़िंदगी है सबसे पहले तो मैं आप सभी मेरे पाठको को धन्यवाद कहना चाहूँगा...कि उन्होने मुझे अपना समझ कर बहुत साथ दिया है ।  जब मैंने यह ब्लॉग शुरू किया था तब मैंने यह नही सोचा था की मेरे इस ब्लॉग को काफी लोग पढ़ेंगे या देखेंगे....परंतु मेरे उम्मीद से कहीं जादा VIEWS आए है। मेरे उन सभी मित्रो को भी शुक्रिया, जिन्होंने इस ब्लॉग को सोशल-नेटवर्क पर  भी साझा किया है... तथा पढ़ा है, मैं आप सब के  इस प्रयास से काफी उत्साहित हुआ हूँ । आपके इस समर्थन एवम साथ के लिए शुक्रिया । मैं आपसे माफी चाहूँगा की मैं अपना यह ब्लॉग नियमित रूप से अपडेट नही कर पा रहा हूँ ,पर भविष्य मे मैं इसे नियमित रूप से अपडेट करने का प्रयास करूंगा...तथा आने वाले दिनों मे... मैं आपके समक्ष एक कहानी शृंखला शुरू करुंगा...हालांकि ये कहानियाँ काल्पनिक होंगी परंतु उन कहानी की प्रेरणा एक सच्ची कहानी से ली गयी होगी.... मैं आपसे भी उम्मीद करता हूँ की आप भी अपनी कहानियाँ मुझसे शेयर करेंगे । आप मुझसे इस ब्लॉग के जरिये भी जुड़ सकते है ब्लॉग के ...

Happiness Is Always With U...😊

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प्रिय पाठक , आज का ब्लॉग शुरू करने से पहले मै आपको नये वर्ष की शुभकामनाए देना चाहूँगा | आशा करता हूँ की आपके लिए यह वर्ष , आपके जीवन मे प्रसन्नता लेकर आयेगा | साल तो बीता , नया दिन-नया साल आया और प्राय: जाते  रहेंगे   |  हम नया साल आते ही उसकी काफ़ी तैयारियाँ करते है और सोचते हैं की इस आने वाले साल मे हम ऐसा क्या करे जिससे की हमारा जीवन कुछ बेहतर बन जाए अक्सर हम प्राय: resolutions(संकल्प) बनाते ऐवम करते है शायद अपने भी किया होगा, पर मैं समझता हूँ की इस resolutions की एक बात जरूर होनी चाहिए वो है हमारी खुशियाँ.... . . . शायद ये खुशियाँ शब्द सुन कर आप सोच रहे होंगे की आप तो खुश रहते है तो आप को इसे अलग से करने की जररूरत क्या है। मेरा संबंध   उन खुशियाँ से है जिसे आप अपने लिए महसूस करते है... हमारी ज़िंदगी का आलम तो ये है का कि हम अपने जीवन मे इत्ते रम से गये है हमे अपने लिए समय ही नही मिल पाता | वही रोज की भागम भाग मे जीवन रस सा गया है | अब तो खुद के लिए भी समय निकालना मुशकिल सा हो गया है। कहने को तो हम हस्ते है , मुसकुराते हैं कहने को तो ज़...

मेरे आँगन की गिलहरी

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स मय उस वक़्त का है जब मै अपने नए घर मे आया था , मेरे इस घर मे दो बड़े आम और नीम के वृक्ष थे | वृक्षो की छाव मन को माह लेती थी | आम के पेड़ मे एक प्यारी सी , नन्ही सी गिलहरी रहा करती थी | गिलहरी देखते ही सब के मन मे सुगबुगाहट सी आती है , मेरे भी मन मे आने लगी... | अब तो  यह मेरे यह रोज का कम हो गया था की उस गिलहरी को देखता | मै  रोज ही उसे निहारता रहता  | वैसे तो गिलहरिया स्वभाव से शरमीली होती है, पर हमारी रोज की आहाट से अब उसने झिझीकना बंद कर दिया था कभी-कभी तो वह घर के भीतर भी आ जाती थी | मेरे लिए तो जैसे वह एक खिलौना मात्र था  | वह पेड़ से नीचे अपने खाने कि तलाश  के लिए आती फिर वापस पेड़ पर चली जाती | प्राय : उसका यह रोज का काम था | दिन बीतीं , महीने बीते परंतु जैसे जैसे दिन बीते गिलहरी ने अपना दायरा बड़ाया , अब वह आम के पेड़ से नीम के पेड़ तक जाने लगी अपने खाने की तलाश के लिए | अपनी जरूरत पूरा होते ही वह लौट जाती थी | एक दिन की बात है मैने देखा की वह रोज की तरह आम पे पेड़ से उतर कर दुसरे किसी पेड़ मे जाया करती थी परंतु आज वह मेरे पड़ोसी के प...

मेरा पहला ब्लॉग ( My First Blog )

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प्रिय पाठक, मै आज अपना पहला ब्लॉग लिखने जा रहा हूँ | मै अपने इस ब्लॉक की शुरुआत अपने ही शीर्षक से करना चाहूँगा | ज़िंदगी U nplugged नाम से ही कुछ अजीब लगता है मानो किसी ने ज़िंदगी का नया version ला दिया हो...... version तो व्ही सा है बस रंग कुछ मैंने  अपने  भर दिये है....  मै अपने इस ब्लॉक मे उन पलो के आपके साथ बटूँगा जो मेरे लिए कुछ खास से हुए है |  जो देखने मे तो सामान्य से लगे हो परंतु  कुछ बातें छुपी हो उनमे, उसे मै आपके समक्ष रखूँगा इस ब्लॉग के जरिये | कही न कही हमारी ज़िंदगी मे कुछ ऐसे पल होते है जो हमारे जीवन मे कुछ अपनी छाप छोड़ जाते है कभी ये पल हसने वाले होते है कभी रुलाने वाले... हमारी ज़िंदगी कुछ होती ही ऐसी है हमे कुछ न कुछ दिखाने की कोशिश करती है कभी हम ध्यान देते है कभी नही  | मेरे लिए nature  ( प्रकृति  ) खास सी रही है.... क्योकि  प्रकृति ने  हर पल मुझे कुछ सिखाने का प्रयास सा किया है मै जिनहे समझ पाया है उन पर विचार किया है | कही न कही मेरे दिमाग मे एक शब्द हमेशा सा चला आ रहा है वो श्ब्द है जिंदगी |...